ॐ त्रियम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मोक्षिय मामृतात्

”पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी का ज्ञान किसने कहा?“

पवित्र गीता जी के ज्ञान को उस समय बोला गया था जब महाभारत का युद्ध होने जा रहा था। अर्जुन ने युद्ध करने से इन्कार कर दिया था। युद्ध क्यों हो रहा था? इस युद्ध को धर्मयुद्ध की संज्ञा भी नहीं दी जा सकती क्योंकि दो परिवारों का सम्पत्ति वितरण का विषय था। कौरवों तथा पाण्डवों का सम्पत्ति बंटवारा नहीं हो रहा था। कौरवों ने पाण्डवों को आधा राज्य भी देने से मना कर दिया था। दोनों पक्षों का बीच-बचाव करने के लिए प्रभु श्री कृष्ण जी तीन बार शान्ति दूत बन कर गए। परन्तु दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी जिद्द पर अटल थे। श्री कृष्ण जी ने युद्ध से होने वाली हानि से भी परिचित कराते हुए कहा कि न जाने कितनी बहन विधवा होंगी ? न जाने कितने बच्चे अनाथ होंगे ? महापाप के अतिरिक्त कुछ नहीं मिलेगा। युद्ध में न जाने कौन मरे, कौन बचे ? तीसरी बार जब श्री कृष्ण जी समझौता करवाने गए तो दोनों पक्षों ने अपने-अपने पक्ष वाले राजाओं की सेना सहित सूची पत्र दिखाया तथा कहा कि इतने राजा हमारे पक्ष में हैं तथा इतने हमारे पक्ष में। जब श्री कृष्ण जी ने देखा कि दोनों ही पक्ष टस से मस नहीं हो रहे हैं, युद्ध के लिए तैयार हो चुके हैं। तब श्री कृष्ण जी ने सोचा कि एक दाव और है वह भी आज लगा देता हूँ। श्री कृष्ण जी ने सोचा कि कहीं पाण्डव मेरे सम्बन्धी होने के कारण अपनी जिद्द इसलिए न छोड़ रहे हों कि श्री कृष्ण हमारे साथ हैं, विजय हमारी ही होगी(क्योंकि श्री कृष्ण जी की बहन सुभद्रा जी का विवाह श्री अर्जुन जी से हुआ था)। श्री कृष्ण जी ने कहा कि एक तरफ मेरी सर्व सेना होगी और दूसरी तरफ मैं होऊँगा और इसके साथ-साथ मैं वचन बद्ध भी होता हूँ कि मैं हथियार भी नहीं उठाऊँगा। इस घोषणा से पाण्डवों के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई। उनको लगा कि अब हमारी पराजय निश्चित है। यह विचार कर पाँचों पाण्डव यह कह कर सभा से बाहर गए कि हम कुछ विचार कर लें। कुछ समय उपरान्त श्री कृष्ण जी को सभा से बाहर आने की प्रार्थना की। श्री कृष्ण जी के बाहर आने पर पाण्डवों ने कहा कि हे भगवन् ! हमें पाँच गाँव दिलवा दो। हम युद्ध नहीं चाहते हैं। हमारी इज्जत भी रह जाएगी और आप चाहते हैं कि युद्ध न हो, यह भी टल जाएगा। पाण्डवों के इस फैसले से श्री कृष्ण जी बहुत प्रसन्न हुए तथा सोचा कि बुरा समय टल गया। श्री कृष्ण जी वापिस आए, सभा में केवल कौरव तथा उनके समर्थक शेष थे। श्री कृष्ण जी ने कहा दुर्योधन युद्ध टल गया है। मेरी भी यह हार्दिक इच्छा थी। आप पाण्डवों को पाँच गाँव दे दो, वे कह रहे हैं कि हम युद्ध नहीं चाहते। दुर्योधन ने कहा कि पाण्डवों के लिए सुई की नोक तुल्य भी जमीन नहीं है। यदि उन्हंे राज्य चाहिए तो युद्ध के लिए कुरुक्षेत्र के मैदान में आ जाऐं। इस बात से श्री कृष्ण जी ने नाराज होकर कहा कि दुर्योधन तू इंसान नहीं शैतान है। कहाँ आधा राज्य और कहाँ पाँच गाँव? मेरी बात मान ले, पाँच गाँव दे दे। श्री कृष्ण से नाराज होकर दुर्योधन ने सभा में उपस्थित योद्धाओं को आज्ञा दी कि श्री कृष्ण को पकड़ो तथा कारागार में डाल दो। आज्ञा मिलते ही योद्धाओं ने श्री कृष्ण जी को चारों तरफ से घेर लिया। श्री कृष्ण जी ने अपना विराट रूप दिखाया। जिस कारण सर्व योद्धा और कौरव डर कर कुर्सियों के नीचे घुस गए तथा शरीर के तेज प्रकाश से आँखें बंद हो गई। श्री कृष्ण जी वहाँ से निकल गए।


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  • Dubai ( U.A.E.)

    From: 14/July/2017

    To: 27/July/2017


    Sri Shyam Sharan Ji Maharaj will give his Jytish, Vastu services at Dubai From 14 July 2017 To 27 July 2017.

  • Shrimad bhagwat katha

    From: 02/01/2015

    To: 04/11/2015


    Bhagwat purana is one of the maha puranic texts of hinduism, with its focus on bhakti (religious devotion) to supreme god vishnu (narayana), primarily focusing on krishna. The bhagavata purana includes many stories well known in hinduism, including the various avatars of vishnu and the life and pastimes of his complete incarnation, krishna or svayam bhagavan. Padma purana categorizes bhagavata purana as a sattva purana (purana which represents goodness and purity).Veda vyasa is accredited for be

  • Mahamritunjay paath, shrimad bhagwat katha

    From: 02/09/2016

    To: 30/09/2016


    The bhagavata purana is considered to be the purest and greatest of all the puranas since it invokes devotion towards lord vishnu and his various incarnations, primarily focusing on krishna since he was the complete incarnation of lord vishnu. The bhagavata purana truly reveals the means for becoming free from all material work, together with the processes of pure transcendental knowledge, renunciation and devotion to lord vishnu and anyone who seriously tries to understand, hears and chants the

  • Shri ram katha

    From: 02/02/2016

    To: 02/06/2016


    Lord ram’s advent on earth aimed at the re-establishment of the truth. He was truly the embodiment of righteousness. His life and journey was in perfect accordance with and adherence to “sanatana dharma” – the eternal truth. despite rigorous trials posed by circumstances, time and again, he set forth an example of ideal living for the entire mankind. Lord Ram was an ideal son, an ideal brother, an ideal husband, an ideal friend, an ideal warrior, an ideal king and an ideal man. Thus, He is a

  • Kaal sarp yog pooja

    From: 02/01/2016

    To: 02/12/2016


    The kalsarp yoga is formed when all the planets are situated between rahu & ketu. When all the planets are hemmed between rahu and ketu i.e., the moon's north node and the moon's south node kal sarp yoga is formed. Complete kal sarp yoga is formed only when half of the chart is unoccupied by planets. He KalSarpa Yoga is a dreaded yoga that can cause one's life to be miserable. A person under the affliction of this yoga leads a life of pain and misfortune. If is highly afflicted this yoga has

  • Ramayan Paath

    From: 30/04/2016

    To: 01/05/2016


    Akhand Ramayan is the process of reading Ramayan in continuous 24 hour. Shri Ramcharitmanas also known as Shri Ramayana is an epic written by Tulsidas (also known as Goswami Tulsidas) was a Hindu poet-saint, reformer and philosopher of 16th Century renowned for his devotion for the God Rama. Originally, the Ramayana was written by Sage Valmiki in Sanskrit language. Tulsidas was acclaimed in his lifetime to be a reincarnation of Valmiki, the composer of the original Ramayana in Sanskrit

  • शत चंडी अनुष्ठान

    From: 03/05/2016

    To: 11/05/2016


     इस अनुष्ठान के द्वारा सभी मनोकामना पूर्ण होती है । इसमे नव दुर्गा की पूजा होती है। इस अनुष्ठान में माताजी को विशेष हवन सामग्री अर्पण की जाती है।